कोलकाता | बंगाल समेत पूर्वी भारत के सबसे बड़े उत्सव दुर्गा पूजा की तारीखें इस साल अक्टूबर के मध्य में पड़ रही हैं। पंचांग के अनुसार 10 अक्टूबर, शनिवार को महालया होगा, जिसके साथ पितृ पक्ष का समापन और देवी पक्ष का आरंभ माना जाता है। कोलकाता में पूजा के मुख्य दिन 16 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक रहेंगे। अधिक मास के कारण इस बार उत्सव पिछले वर्ष की तुलना में देर से आ रहा है।
कोलकाता का दुर्गा पूजा कैलेंडर
- 10 अक्टूबर (शनिवार): महालया
- 16 अक्टूबर (शुक्रवार): षष्ठी तिथि आरंभ, बिल्व निमंत्रण
- 17 अक्टूबर (शनिवार): कल्पारंभ और अकाल बोधन
- 18 अक्टूबर (रविवार): महा सप्तमी, कोलाबोउ पूजा
- 19 अक्टूबर (सोमवार): महा अष्टमी, कुमारी पूजा और संधि पूजा
- 20 अक्टूबर (मंगलवार): महा नवमी
- 21 अक्टूबर (बुधवार): विजयादशमी, प्रतिमा विसर्जन और सिंदूर उत्सव
तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण कुछ दिनों में दो तिथियां एक साथ पड़ रही हैं, इसलिए अलग-अलग पूजा समितियों और पंचांगों में समय को लेकर थोड़ा अंतर संभव है।
महालया की सुबह का खास महत्व
बंगाली परिवारों में महालया की सुबह भोर से पहले उठकर चंडी पाठ और 'महिषासुरमर्दिनी' का पाठ सुनने की पुरानी परंपरा है। इसी दिन कई लोग गंगा घाटों पर जाकर पूर्वजों को तर्पण भी करते हैं। मान्यता है कि इसी समय से मां दुर्गा का धरती की ओर आगमन शुरू होता है।
पंडाल घूमने वालों के लिए सलाह
कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में जगह मिल चुकी है और हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पंडाल देखने पहुंचते हैं। यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए कुछ बातें ध्यान रखने लायक हैं:
- त्योहारी सीजन में उड़ान और ट्रेन टिकट की मांग तेजी से बढ़ती है, इसलिए बुकिंग जल्दी करें
- सप्तमी से नवमी तक शाम को सबसे ज्यादा भीड़ रहती है, दिन के समय या देर रात पंडाल घूमना अपेक्षाकृत आसान रहता है
- आरामदायक जूते पहनें, पानी साथ रखें और भीड़ में बच्चों व बुजुर्गों का खास ध्यान रखें
- स्थानीय पुलिस और मेट्रो की ओर से जारी यातायात व समय संबंधी सूचनाओं पर नजर रखें
उत्तर भारत में इन्हीं दिनों शारदीय नवरात्रि मनाई जाएगी, जिसकी शुरुआत 11 अक्टूबर को घटस्थापना से होगी। आगरा, वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में रहने वाले बंगाली समाज की ओर से भी भव्य पूजा पंडाल सजाए जाते हैं।


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