नई दिल्ली | विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेतृत्व में हर साल 17 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व रोगी सुरक्षा दिवस इस बार गैर-संचारी रोगों (NCD) के मरीजों पर केंद्रित है। वर्ष 2026 की थीम 'Safe care for noncommunicable diseases' रखी गई है, जबकि अभियान का नारा 'Safe care for life!' है। इस दिवस का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान होने वाले टाले जा सकने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
क्यों चुनी गई यह थीम
WHO के अनुसार हृदय रोग, कैंसर, डायबिटीज और सांस की पुरानी बीमारियों जैसे गैर-संचारी रोग दुनिया में होने वाली कुल मौतों में से करीब 74 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे मरीजों को जीवनभर लगातार इलाज की जरूरत होती है और उन्हें बार-बार अलग-अलग अस्पतालों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य केंद्रों से गुजरना पड़ता है। इसी प्रक्रिया में गलती और नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।
किन जोखिमों की ओर इशारा
- एक साथ कई दवाओं का सेवन और उनसे जुड़ी गलतियां
- जटिल उपचार योजनाएं, जिन्हें समझना मरीज के लिए मुश्किल होता है
- एक स्वास्थ्य केंद्र से दूसरे में रेफर होने के दौरान जानकारी का छूट जाना
- लंबे समय तक चलने वाली बीमारी में नियमित निगरानी की कमी
WHO का कहना है कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवा लेने वाले हर 10 में से एक मरीज को किसी न किसी तरह का नुकसान होता है और इनमें से लगभग आधे मामलों को रोका जा सकता है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पर फोकस
इस साल का अभियान प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के जरिए पूरी उपचार प्रक्रिया में सुरक्षा मजबूत करने की बात करता है। साथ ही, इलाज और सेवाओं की रूपरेखा बनाने में खुद NCD से जूझ रहे लोगों की सार्थक भागीदारी पर भी जोर दिया गया है। WHO और उसके क्षेत्रीय कार्यालय इस मौके पर वैश्विक और क्षेत्रीय वेबिनार आयोजित कर रहे हैं।
मरीज और परिजन क्या कर सकते हैं
- अपनी सभी दवाओं की सूची, खुराक और समय लिखकर रखें और हर डॉक्टर को दिखाएं
- पुरानी जांच रिपोर्ट और पर्चे एक फाइल में संभालकर रखें
- कोई दवा समझ न आए तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछने में संकोच न करें
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा शुरू या बंद न करें
- ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच कराते रहें
भारत में भी उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षित और निरंतर देखभाल की यह थीम देश के लिए खास तौर पर प्रासंगिक है। किसी भी लक्षण या दवा से जुड़ी शंका होने पर डॉक्टर की सलाह लें।


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