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गुरुवार, 17 सितंबर 2026
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तस्वीरों में भोपाल का अनोखा पंडाल: 'कांतारा' की थीम पर सजा दरबार, गणेश के साथ विराजे गुलिगा और पंजुरली देव

भोपाल के इंद्रपुरी में 'इंद्रपुरी के राजा' पंडाल ने दक्षिण भारतीय फिल्म कांतारा से प्रेरित सजावट की है। तटीय कर्नाटक की लोक परंपरा के देवताओं के साथ गणपति की प्रतिमा आकर्षण बनी है।

तस्वीरों में भोपाल का अनोखा पंडाल: 'कांतारा' की थीम पर सजा दरबार, गणेश के साथ विराजे गुलिगा और पंजुरली देव
प्रतीकात्मक तस्वीर: रोशनी से सजा एक गणेश पंडाल — फोटो: Dharmadhyaksha / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

भोपाल | गणेशोत्सव में हर साल पंडाल आयोजक कुछ नया करने की कोशिश करते हैं। इस बार मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐसा पंडाल चर्चा में है, जिसकी सजावट दक्षिण भारतीय फिल्म 'कांतारा' की दुनिया से प्रेरित है। इंद्रपुरी इलाके में 'इंद्रपुरी के राजा' समूह ने यह अनोखा दरबार सजाया है।

तस्वीर 1: बीच में गणपति, दोनों ओर लोक देवता

पंडाल में तीन प्रतिमाएं एक खास क्रम में स्थापित की गई हैं। बीच में भगवान गणेश विराजमान हैं, जबकि उनके दोनों ओर गुलिगा और पंजुरली देव की प्रतिमाएं हैं। ये दोनों तटीय कर्नाटक की लोक परंपराओं में पूजे जाने वाले देवता हैं, जिन्हें फिल्म कांतारा के बाद देशभर में पहचान मिली।

तस्वीर 2: स्वर्ण आभूषणों से सजे गजानन

गणेश प्रतिमा को सुनहरे आभूषणों और पारंपरिक गहनों से सजाया गया है। प्रतिमा की भाव-भंगिमा और बारीक कारीगरी लोगों का ध्यान खींच रही है।

तस्वीर 3: गुलिगा का प्रभावशाली रूप

गुलिगा देव की प्रतिमा में गहरे रंग की बनावट, नाटकीय श्रृंगार और लाल फूलों की सजावट दिखाई देती है, जो लोक कला की झलक पेश करती है।

तस्वीर 4: योद्धा रूप में पंजुरली देव

पंजुरली देव को विस्तृत शिरोभूषण और प्रतीकात्मक शस्त्र के साथ योद्धा जैसे स्वरूप में दर्शाया गया है। पूरे पंडाल की पृष्ठभूमि भी फिल्म से प्रेरित पारंपरिक डिजाइनों और कलाकृतियों से तैयार की गई है।

तस्वीर 5: आरती और उत्सव

आयोजकों के अनुसार बप्पा के आगमन समारोह और रात 8 बजे आरती का कार्यक्रम रखा गया, जिसके बाद डीजे पर संगीत कार्यक्रम रखा गया।

  • स्थान: इंद्रपुरी, भोपाल
  • आयोजक: इंद्रपुरी के राजा
  • थीम: फिल्म कांतारा से प्रेरित
  • प्रतिमाएं: भगवान गणेश, गुलिगा और पंजुरली देव

इस पंडाल की खासियत यह है कि उत्तर और मध्य भारत के गणेशोत्सव में दक्षिण भारत की लोक आस्था को एक साथ पिरोया गया है। यही वजह है कि इसे शहर के सबसे अलग पंडालों में गिना जा रहा है। उत्सव 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी तक चलेगा।

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तस्वीरें डेस्क · संपादकीय डेस्क

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