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सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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मदन मित्रा TMC के बागी खेमे में शामिल, पार्टी संकट के लिए अभिषेक बनर्जी को ठहराया जिम्मेदार

कोलकाता | तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके में, वरिष्ठ पार्टी नेता और विधायक मदन मित्रा बुधवार को रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी धड़े में शामिल हो गए, जिससे…

मदन मित्रा TMC के बागी खेमे में शामिल, पार्टी संकट के लिए अभिषेक बनर्जी को ठहराया जिम्मेदार
Trinamool Congress (TMC), senior party leader and MLA Madan Mitra on Wednesday joined the rebel faction led by Ritabrata Banerjee, intensifying the internal crisis within the party following its defeat in the West Bengal Assembly elections.

कोलकाता | तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके में, वरिष्ठ पार्टी नेता और विधायक मदन मित्रा बुधवार को रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी धड़े में शामिल हो गए, जिससे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद पार्टी के भीतर का आंतरिक संकट और गहरा गया।

यह घटनाक्रम प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पश्चिम बंगाल में नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मित्रा की पत्नी और दो बेटों को पूछताछ के लिए तलब किए जाने के एक दिन बाद आया। हालांकि, मित्रा ने इस बात से इनकार किया कि ED की कार्रवाई का उनके खेमा बदलने के फैसले से कोई संबंध है।

रितब्रत बनर्जी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मित्रा ने कहा कि उन्होंने "सिर्फ विधानसभा में अपना कमरा बदला है," साथ ही यह स्पष्ट किया कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के भीतर की सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है।

"मैं विधायक बना हुआ हूं, लेकिन मैंने तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी हर चीज छोड़ दी है। व्यावहारिक रूप से, मैं अब TMC विधायक नहीं हूं," उन्होंने कहा।

अभिषेक बनर्जी पर निशाना

मित्रा ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और TMC प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोला और उन पर पार्टी के भविष्य से ऊपर निजी हितों को रखने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सुझाव दिया था कि अभिषेक चुनावी झटके के बाद पार्टी के पुनर्निर्माण में मदद के लिए छह महीने के लिए अस्थायी रूप से अलग हट जाएं, लेकिन यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।

मित्रा के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की चिंताओं को दूर करने के बजाय एक व्यक्ति की रक्षा करने का विकल्प चुना।

बागी धड़े में शामिल होने के बावजूद, मित्रा ने ममता बनर्जी से राजनीतिक संघर्ष जारी रखने की अपील की और कहा कि अंतिम फैसला अंततः जनता का होगा।

TMC में फूट गहराई

पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद से तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती आंतरिक फूट देखने को मिली है। बड़ी संख्या में विधायक और सांसद या तो रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी धड़े में शामिल हो गए हैं या किसी अन्य राजनीतिक संगठन के साथ जुड़ गए हैं, जिससे मूल तृणमूल कांग्रेस के स्वामित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

यह मामला फिलहाल चुनाव आयोग के समक्ष है, जिससे यह तय होने की उम्मीद है कि कौन सा धड़ा पार्टी का आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न बरकरार रखेगा।

ममता बनर्जी नीत धड़े ने बार-बार आरोप लगाया है कि बागियों में शामिल होने वाले नेताओं ने ऐसा केंद्रीय जांच एजेंसियों के दबाव, राजनीतिक प्रलोभनों या भाजपा नीत केंद्र सरकार की कार्रवाई के डर के कारण किया है।

ED ने परिवार के सदस्यों को किया तलब

यह राजनीतिक घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले की प्रवर्तन निदेशालय की चल रही जांच की पृष्ठभूमि में आया है।

अधिकारियों के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के हिस्से के रूप में मित्रा की पत्नी और दो बेटों को अगले सप्ताह पूछताछ के लिए तलब किया गया है।

पिछले महीने, ED ने मित्रा से जुड़े कई स्थानों पर तलाशी ली थी, जिनमें भवानीपुर और कालीघाट स्थित उनके आवास, साथ ही कोलकाता और आसपास के इलाकों में अन्य परिसर शामिल थे।

पूर्व जांच

मदन मित्रा पहले भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच का सामना कर चुके हैं। उन्हें 2014 में सारदा चिट फंड घोटाले के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार किया था और 600 दिनों से अधिक हिरासत में बिताने के बाद जमानत पर रिहा किया गया था।

उन्हें 2021 में फिर से नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तार किया गया, जहां उन पर रिश्वत लेने के आरोप लगे। मित्रा ने दोनों मामलों में लगातार सभी आरोपों से इनकार किया है।

अपने राजनीतिक कदम के समय को लेकर अटकलों को खारिज करते हुए मित्रा ने कहा कि ED जांच में उनके परिवार का सहयोग उनके बागी खेमे में शामिल होने के फैसले से पूरी तरह अलग है।

इस ताजा घटनाक्रम से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अनिश्चितता और तेज होने की उम्मीद है क्योंकि दोनों धड़े तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण के लिए संघर्ष जारी रखे हुए हैं और राजनीतिक व कानूनी चुनौतियों के अगले चरण की तैयारी कर रहे हैं।

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