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सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने की अनुमति दी, न्यायिक समीक्षा के अधीन

कोर्ट ने कहा—न्यायिक जांच पूरी होने तक नियुक्तियां अस्थायी रहेंगीचेन्नई | मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार को…

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने की अनुमति दी, न्यायिक समीक्षा के अधीन
The Madras High Court on Friday allowed the Tamil Nadu government, led by the Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK)

कोर्ट ने कहा—न्यायिक जांच पूरी होने तक नियुक्तियां अस्थायी रहेंगी

चेन्नई | मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार को करूर भगदड़ त्रासदी में अपनी जान गंवाने वालों के परिवारों को सरकारी नौकरियां देने के अपने फैसले पर आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि नियुक्तियां अस्थायी होंगी और न्यायिक समीक्षा के अधीन रहेंगी।

मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर. शक्तिवेल की एक खंडपीठ ने राज्य सरकार को दिन में बाद में निर्धारित एक सार्वजनिक समारोह के दौरान नियुक्ति पत्र वितरित करने की अनुमति दी, यह टिप्पणी करते हुए कि इस स्तर पर सरकार द्वारा लिए गए किसी नीतिगत फैसले में न्यायपालिका का हस्तक्षेप करना अनुचित होगा।

पीठ ने कहा कि लाभार्थी नियुक्ति आदेश प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन जब तक अदालत इसमें शामिल कानूनी मुद्दों की अपनी जांच पूरी नहीं कर लेती, तब तक नियुक्तियां अस्थायी रहेंगी। न्यायाधीशों ने यह भी संकेत दिया कि मामले की विस्तार से सुनवाई जुलाई के अंत से पहले की जाएगी, नियुक्तों को उनका पहला वेतन मिलने से काफी पहले।

सरकारी फैसले को चुनौती

यह आदेश मदुरै के अधिवक्ता थीरन थिरुमुरुगन द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिन्होंने सितंबर 2025 में करूर भगदड़ में मारे गए 41 पीड़ितों के परिवारों को सरकारी रोजगार देने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सार्वजनिक त्रासदियों से प्रभावित परिवारों को स्थायी सरकारी नौकरी देने को नियंत्रित करने वाली कोई समान कानूनी नीति नहीं है। उनके अनुसार, स्पष्ट दिशानिर्देशों के बिना एक घटना में रोजगार देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत गारंटीकृत समानता और समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन कर सकता है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सरकारी नौकरियां सार्वजनिक पद हैं जिनके लिए प्रतिस्पर्धा करने का अधिकार हर पात्र नागरिक को है, और अपवाद केवल एक पारदर्शी कानूनी ढांचे के जरिए ही किए जाने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का हवाला

याचिकाकर्ता ने आगे तर्क दिया कि करूर भगदड़ से संबंधित कानूनी कार्यवाही अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसलिए, उन्होंने हाईकोर्ट से आग्रह किया कि जब तक शीर्ष अदालत अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देती, तब तक सरकार को नियुक्ति आदेश जारी करने से रोका जाए।

सुनवाई के दौरान, राज्य के वकील ने पीठ को बताया कि सरकारी नौकरी देने के प्रस्ताव को चुनौती देते हुए पहले सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया गया था, लेकिन उस आवेदन को बाद में वापस ले लिया गया।

सरकार ने एक पूर्व उदाहरण का भी हवाला दिया जिसमें थूथुकुडी पुलिस फायरिंग के पीड़ितों के परिवारों को रोजगार प्रदान किया गया था।

कोर्ट ने खींचा अंतर

हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि थूथुकुडी मामले को एक समान मिसाल के रूप में नहीं माना जा सकता।

न्यायाधीशों ने कहा कि थूथुकुडी की घटना में राज्य द्वारा पुलिस की ज्यादती के आरोप शामिल थे, जबकि करूर भगदड़ एक अलग प्रकार की त्रासदी थी और यह कथित राज्य हिंसा से उत्पन्न नहीं हुई थी।

लोक सेवा आयोग से मांगा जवाब

इसमें शामिल बड़े कानूनी सवालों को ध्यान में रखते हुए, हाईकोर्ट ने तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (टीएनपीएससी) के सदस्य सचिव को भी स्वतः संज्ञान लेते हुए पक्षकार बनाया।

आयोग को अनुकंपा नियुक्तियों को नियंत्रित करने वाले मौजूदा नियमों की व्याख्या करते हुए एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने और यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है कि करूर पीड़ितों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरियां प्रस्तावित करते समय क्या उन दिशानिर्देशों का पालन किया गया था।

मामले की फिर होगी सुनवाई

फिलहाल सरकार को नियुक्तियों पर आगे बढ़ने की अनुमति देते हुए, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फैसले की वैधता न्यायिक जांच के लिए खुली रहती है।

मामले की सुनवाई इस महीने के अंत में फिर से होने की उम्मीद है, जब अदालत यह जांच करेगी कि क्या नियुक्तियां स्थायी होने से पहले सरकार का फैसला संवैधानिक सिद्धांतों और मौजूदा सेवा नियमों के अनुरूप है।

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Dharmendra Singh
Dharmendra Singh · संवाददाता

धर्मेंद्र सिंह Agenda Post के संवाददाता हैं और भारत व दुनिया भर की खबरों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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