शुक्रवार, 3 जुलाई को मद्रास हाई कोर्ट ने डीएमके विधायक अनीता आर राधाकृष्णन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उन पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के बारे में वह टिप्पणी करने के आरोप थे, जिन्हें अधिकारियों ने आपत्तिजनक बताया। राधाकृष्णन ने कथित तौर पर 20 जून को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में विधानसभा में मुख्यमंत्री के व्यवहार की आलोचना की थी, उनकी तुलना खुद को फंसा हुआ महसूस करने वाले किसी व्यक्ति से की और राजनीति में आने से पहले फिल्म उद्योग में बिताए उनके समय का हवाला दिया। किसी की शिकायत के बाद पुलिस ने राधाकृष्णन के खिलाफ बीएनएस की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और धारा 353(2) (सार्वजनिक अशांति फैलाने की आशंका वाले बयान) के तहत मामले दर्ज किए। गिरफ्तारी की आशंका से राधाकृष्णन ने सुरक्षा के लिए अदालत का रुख किया।
न्यायमूर्ति जीके इलनथिरैयन ने यह दलील नहीं मानी। सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि एक विधायक होने के नाते राधाकृष्णन को बेहतर समझ होनी चाहिए थी। "यह कैसी बात है?" जज ने सीधे उनसे पूछा। "कोई भी हो, आपको मुख्यमंत्री का सम्मान करना चाहिए।" जज ने यह भी कहा कि तमिलनाडु 1967 से ही फिल्म उद्योग के नेताओं को चुनता आ रहा है। इसलिए राधाकृष्णन की टिप्पणियां न सिर्फ अनुचित थीं, बल्कि भ्रमित करने वाली भी थीं। "आप कोई आम आदमी नहीं हैं। आप विधानसभा के सदस्य हैं," जज ने उन्हें याद दिलाया।
जब उनकी बारी आई, तो वरिष्ठ अधिवक्ता एनआर एलंगो ने तर्क दिया कि राधाकृष्णन का भाषण उन धाराओं की शर्तों को पूरा नहीं करता जिनके तहत उन पर आरोप लगाए गए हैं। एलंगो ने कहा कि भाषण में कोई वास्तविक उकसावा नहीं था और ज्यादा से ज्यादा यह मानहानि का मामला है, जिसकी अपनी कानूनी प्रक्रिया है। उन्होंने माना कि राधाकृष्णन के शब्द मानहानिकारक थे, लेकिन जोर देकर कहा कि पुलिस को मूल रूप से मानहानि के इस मामले में इन धाराओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि कोई बयान सार्वजनिक कर्तव्य से जुड़ा हो, तो अभियोजक कार्रवाई कर सकता है। अन्यथा, यह एक निजी मामला है और शिकायत का निपटारा तदनुसार होना चाहिए — न कि पुलिस द्वारा इन विशेष कानूनों का इस्तेमाल करके।
दूसरी ओर, राज्य ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन ने सुनवाई के दिन तक भी कोई पछतावा नहीं दिखाया। सरकारी वकील ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री के पद के खिलाफ कठोर बयानों पर यदि रोक न लगाई गई, तो इससे किसी को भी मुख्यमंत्री के खिलाफ कुछ भी कहने की छूट मिल जाएगी। "उन्हें कुछ संयम बरतना चाहिए था। अब भी कोई पछतावा नहीं है," राज्य ने तर्क दिया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने राधाकृष्णन की जमानत याचिका खारिज कर दी। लिखित आदेश अभी लंबित है।
मामले का शीर्षक: अनीता आर राधाकृष्णन बनाम राज्य
उद्धरण: 2026 लाइवलॉ (मद) 294
मामला संख्या: सीआरएल ओपी (एमडी) 12851, 2026
मद्रास हाई कोर्ट ने डीएमके विधायक अनीता आर राधाकृष्णन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
शुक्रवार, 3 जुलाई को मद्रास हाई कोर्ट ने डीएमके विधायक अनीता आर राधाकृष्णन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उन पर तमिलनाडु के…



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