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सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला विवाद में नोटिस जारी किया, अंतरिम राहत देने से इनकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कई मुस्लिम पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, जिनमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला…

सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला विवाद में नोटिस जारी किया, अंतरिम राहत देने से इनकार
The Supreme Court on Tuesday issued notices on petitions filed by several Muslim parties challenging the Madhya Pradesh High Court's judgment declaring the historic Bhojshala-Kamal Maula complex

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कई मुस्लिम पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, जिनमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किया गया और परिसर के भीतर नमाज अदा करने पर रोक लगाई गई। हालांकि, शीर्ष अदालत ने पहले की उस व्यवस्था को बहाल करके अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, जिसके तहत मुसलमानों को निर्धारित दिनों में हिंदू पूजा के साथ-साथ शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि वह ऐसा कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं करना चाहती जो सार्वजनिक शांति भंग कर सके या तनाव पैदा कर सके। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, 'हम ऐसा कोई आदेश पारित न करें जो तनाव पैदा कर सके। दोनों पक्षों को धैर्य रखना चाहिए।'

एक अंतरिम व्यवस्था के रूप में, अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह मुस्लिम पक्ष को विवादित स्थल के निकट एक अलग खुली जगह प्रदान करे ताकि दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे के बीच शुक्रवार की नमाज अदा की जा सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है, मामले के अंतिम परिणाम के अधीन है, और इससे किसी भी पक्ष के कानूनी अधिकारों या दावों पर असर नहीं पड़ेगा।

अदालत ने मुस्लिम याचिकाकर्ताओं के इस अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सुप्रीम कोर्ट से पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना स्मारक में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं करना चाहिए।

मुस्लिम याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी, अभिषेक मनु सिंघवी और मीनाक्षी अरोड़ा ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट के फैसले ने एक लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था को भंग कर दिया है, जिसके तहत हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय निर्धारित दिनों में इस स्थल पर पूजा-अर्चना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था दशकों से मौजूद थी और सांप्रदायिक सद्भाव को दर्शाती थी।

मध्य प्रदेश राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले की व्यवस्था को बहाल करने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले को पहले ही लागू किया जा चुका है और इस स्तर पर इसे उलटने से प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह इस मामले को तीन सप्ताह बाद अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगा। तब तक, शुक्रवार की नमाज के संबंध में अस्थायी व्यवस्था और स्थल पर संरचनात्मक बदलावों पर रोक लगाने वाला निर्देश लागू रहेगा।

यह विवाद धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर पर केंद्रित है, जो एक ऐसा स्मारक है जिसे हिंदू देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर और मुसलमान कमाल मौला मस्जिद होने का दावा करते हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में इस स्थल को मंदिर के रूप में मान्यता देने के पक्ष में फैसला सुनाया और परिसर के भीतर नमाज अदा करने पर रोक लगा दी।

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