दुबई/तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका द्वारा ईरान में करीब 90 ठिकानों को निशाना बनाकर सैन्य हमलों की एक नई लहर शुरू करने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष तेजी से बढ़ गया है। कुछ ही घंटों के भीतर तेहरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सेना से जुड़े ठिकानों पर जवाबी ड्रोन और मिसाइल हमलों की घोषणा कर दी, जिससे एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बंदरगाहों, सैन्य ढांचे, वायु रक्षा प्रणालियों और रणनीतिक सुविधाओं को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की रक्षा करना था।
हालांकि ईरान ने इन हमलों को आक्रामकता का कृत्य बताते हुए इनकी निंदा की। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी हमलों की दो रातों के दौरान कम से कम 14 लोग मारे गए और "समानुपातिक जवाब" देने का संकल्प लिया। इसके तुरंत बाद तेहरान ने कतर, बहरीन और कुवैत में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी ली।

खाड़ी के कुछ हिस्सों में अधिकारियों ने हवाई हमले के सायरन बजाए, जबकि वायु रक्षा प्रणालियों ने कई ड्रोन और मिसाइलों को रोका। रिपोर्टों के अनुसार कुछ प्रक्षेपास्त्रों को मार गिराया गया, वहीं अधिकारी नुकसान की सीमा का आकलन करते रहे। शुरुआती रिपोर्टों में सीमित हताहतों का संकेत मिला, हालांकि सुरक्षा स्थिति अस्थिर बनी रही।
इस ताजा हमले-जवाब ने दुनिया के सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। इस क्षेत्र में किसी भी लंबे व्यवधान का वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है।
क्षेत्रीय सरकारों ने संयम बरतने की अपील की है, वहीं कई देशों ने आगे तनाव बढ़ने से रोकने के लिए वाशिंगटन और तेहरान दोनों से कूटनीतिक बातचीत की ओर लौटने का आग्रह किया। सैन्य हमलों के बावजूद रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह निलंबित नहीं हुए हैं।
यह नई शत्रुता कई हफ्तों की नाजुक बातचीत के बाद सामने आई है और इसने क्षेत्र को स्थिर करने के प्रयासों पर नई अनिश्चितता डाल दी है। सुरक्षा विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि किसी भी पक्ष द्वारा कोई भी आगे का जवाबी हमला अतिरिक्त देशों को संघर्ष में खींच सकता है और पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता को गहरा कर सकता है।



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