कराकस/वेनेजुएला: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला इस समय एक भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। हाल ही में दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जिसके ठीक कुछ सेकंड बाद दूसरा और अधिक विनाशकारी 7.5 तीव्रता का भूकंप आया। इन भूकंपों का केंद्र वेनेजुएला के उत्तरी तटीय इलाके, खासकर ला गुआइरा के आसपास था।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में अब तक करीब 920 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3360 से अधिक लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। राहत एजेंसियों के अनुसार, सैकड़ों लोग अब भी इमारतों के मलबे में दबे हो सकते हैं, जिसके चलते मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।
भूकंप के कारण राजधानी कराकस समेत कई शहरों में भारी तबाही देखने को मिली। बहुमंजिला इमारतें ढह गईं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और कई इलाकों में बिजली व संचार सेवाएं ठप पड़ गईं। हवाई अड्डे का संचालन भी प्रभावित हुआ है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में शुरुआती दिक्कतें आईं।
राहत कर्मी लगातार मलबा हटाने में जुटे हैं। कई जगहों पर स्थानीय नागरिक भी अपने हाथों से मलबा हटाकर अपने प्रियजनों को खोज रहे हैं। हर बीतते घंटे के साथ जीवित बचे लोगों को बचाने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन बचाव दल हार मानने को तैयार नहीं है। अस्पतालों में घायलों की भारी भीड़ है और चिकित्सा संसाधनों पर जबरदस्त दबाव है।
इस मानवीय संकट के बीच, दुनिया के कई देशों ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत भी वेनेजुएला की मदद के लिए आगे आया है और उसने ''ऑपरेशन अमिस्ताद'' शुरू किया है। इस अभियान के तहत भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान राहत सामग्री, दवाओं और चिकित्सा सहायता के साथ रवाना हुए हैं। इसके अलावा, भारतीय सेना की 41 सदस्यीय चिकित्सा टीम को भी प्रभावित क्षेत्रों में सहायता के लिए भेजा गया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कठिन समय में भारत वेनेजुएला के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। ''अमिस्ताद'' एक स्पेनिश शब्द है जिसका अर्थ है दोस्ती—और यह मिशन भारत की मानवीय प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में उभरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वेनेजुएला के इतिहास के सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें राहत और बचाव कार्यों पर टिकी हैं, वहीं लाखों लोग एक सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में मदद का इंतजार कर रहे हैं।
—द ओपन प्रेस


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