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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
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आगरा: ₹40 लाख की कथित लूट निकली फर्जी कहानी; पुलिस ने दो घंटे में सुलझाया मामला

प्रस्तुति: शिव उपाध्याय आगरा, 15 जुलाई: आगरा के खंदौली क्षेत्र में ₹40 लाख से जुड़ी जो घटना पहले दिनदहाड़े हुई एक सनसनीखेज लूट लग रही थी, वह असल में एक गढ़ी हुई कहानी निकली। महज दो…

आगरा: ₹40 लाख की कथित लूट निकली फर्जी कहानी; पुलिस ने दो घंटे में सुलझाया मामला
What initially appeared to be a sensational daylight robbery involving ₹40 lakh in Agra's Khandauli area has turned out to be a fabricated story.

प्रस्तुति: शिव उपाध्याय 

आगरा, 15 जुलाई: आगरा के खंदौली क्षेत्र में ₹40 लाख से जुड़ी जो घटना पहले दिनदहाड़े हुई एक सनसनीखेज लूट लग रही थी, वह असल में एक गढ़ी हुई कहानी निकली। शिकायत मिलने के महज दो घंटे के भीतर आगरा पुलिस ने सच्चाई उजागर कर दी और खुलासा किया कि कोई लूट हुई ही नहीं थी तथा शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर आर्थिक तंगी के चलते इस घटना को गढ़ा था।

पुलिस के अनुसार, मंगलवार दोपहर एक आपातकालीन कॉल में बताया गया कि आगरा-अलीगढ़ हाईवे पर बगल घूंसा गांव के पास मोटरसाइकिल सवार चार बदमाशों ने एक सराफा व्यापारी से ₹40 लाख लूट लिए। इस सूचना पर खंदौली पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), एत्मादपुर तुरंत हरकत में आ गए।

शिकायतकर्ता रामवीर सिंह, जो हाथरस जिले के सादाबाद क्षेत्र के कुरसंडा गांव के सराफा व्यापारी हैं, ने शुरू में जांचकर्ताओं को बताया कि वे चांदी खरीदने आगरा के किनारी बाजार जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि चार हमलावरों ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मारी, उन्हें जमीन पर गिरा दिया, तमंचे से धमकाया और ₹40 लाख नकदी से भरा बैग लेकर फरार हो गए।

आरोप की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की। अधिकारियों ने क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, तकनीकी साक्ष्य जुटाए और शिकायतकर्ता से विस्तार से पूछताछ की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के बीच कई विरोधाभास सामने आए।

बाद में पुलिस ने वह बैग बरामद कर लिया जिसके चोरी होने की बात कही गई थी और लूट होने के दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं मिला। जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि यह घटना गढ़ी गई थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रामवीर सिंह कथित तौर पर करीब ₹60 लाख के कर्ज में थे और आशंका है कि उन्होंने अपनी आर्थिक देनदारियों से निपटने के प्रयास में लूट की कहानी गढ़ी। जांचकर्ताओं ने बताया कि न तो सीसीटीवी फुटेज और न ही फोरेंसिक व तकनीकी साक्ष्य उस स्थान पर किसी लूट के होने का संकेत देते हैं।

थाना प्रभारी (एसएचओ) ने बताया कि गहन पूछताछ और साक्ष्यों की जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि कथित लूट कभी हुई ही नहीं थी। अब शिकायतकर्ता के खिलाफ पुलिस को झूठी जानकारी देने और जांचकर्ताओं को गुमराह करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि झूठी शिकायत का त्वरित पर्दाफाश सीसीटीवी निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रह सहित आधुनिक जांच तकनीकों की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे झूठी शिकायतें दर्ज न कराएं, यह चेतावनी देते हुए कि गढ़ी गई आपराधिक रिपोर्टें न केवल कीमती पुलिस संसाधनों को बर्बाद करती हैं बल्कि वास्तविक अपराधों की जांच को भी प्रभावित करती हैं।

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