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गुरुवार, 17 सितंबर 2026
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कैबिनेट का बड़ा फैसला: ईपीएफओ वेतन सीमा 15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये, 51 लाख कर्मचारियों को फायदा

करीब 12 साल बाद ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा में बदलाव हुआ है। 15 से 25 हजार रुपये मासिक कमाने वाले लाखों कर्मचारी अब पीएफ, पेंशन और बीमा के दायरे में आएंगे।

कैबिनेट का बड़ा फैसला: ईपीएफओ वेतन सीमा 15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये, 51 लाख कर्मचारियों को फायदा
प्रतीकात्मक तस्वीर: दिल्ली की एक कार्यशाला में काम करते कर्मचारी। फोटो: urbzoo / Wikimedia Commons (CC BY 2.0)

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 16 सितंबर को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़ा एक अहम फैसला लिया गया। कैबिनेट ने ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इस कदम से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के अनिवार्य दायरे में आ जाएंगे।

किसे मिलेगा लाभ

अब तक जिन कर्मचारियों का मासिक वेतन 15 हजार रुपये से ज्यादा था, उनके लिए ईपीएफओ की सदस्यता अनिवार्य नहीं थी। नई सीमा लागू होने के बाद 15 से 25 हजार रुपये के बीच वेतन पाने वाले कर्मचारी भी वैधानिक रूप से इसके दायरे में आ जाएंगे। रिपोर्टों के मुताबिक, नई व्यवस्था विश्वकर्मा जयंती 2026 से प्रभावी होगी। इन कर्मचारियों को तीन प्रमुख योजनाओं का लाभ मिलेगा:

  • ईपीएफ: भविष्य निधि के रूप में नियमित बचत
  • ईपीएस: कर्मचारी पेंशन योजना के तहत सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन
  • ईडीएलआई: कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा

12 साल बाद बदली सीमा

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईपीएफओ की वेतन सीमा 2004 से 2014 तक एक ही स्तर पर रही थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। तब से वेतन स्तर में लगातार बढ़ोतरी और औपचारिक रोजगार के विस्तार को देखते हुए इसमें संशोधन की मांग उठती रही थी। सरकार का तर्क है कि मौजूदा फैसला बढ़ती आय और रोजगार के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखकर लिया गया है।

सरकारी खर्च पर असर

रिपोर्टों के अनुसार, इस फैसले से सरकार का सालाना खर्च लगभग 10,250 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 11,339 करोड़ रुपये हो सकता है। पांच वर्षों में इस मद में कुल अनुमानित खर्च 56,696 करोड़ रुपये बताया गया है। फिलहाल ईपीएफओ से करीब 7.98 करोड़ सदस्य और लगभग 7.68 लाख प्रतिष्ठान जुड़े हैं, जबकि 82 लाख लोग पेंशन का लाभ ले रहे हैं।

श्रम मामलों के जानकारों का मानना है कि इस बदलाव से निजी क्षेत्र में काम करने वाले मध्यम आय वर्ग के कर्मचारियों की दीर्घकालिक बचत बढ़ेगी। हालांकि, नियोक्ताओं पर अंशदान का बोझ भी कुछ बढ़ेगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई व्यवस्था को जमीन पर लागू करने के लिए ईपीएफओ किस तरह के दिशा-निर्देश जारी करता है।

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भारत डेस्क
भारत डेस्क · संपादकीय डेस्क

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