पटना | बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार, 15 सितंबर को सैकड़ों प्रतियोगी छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। अभ्यर्थी 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा और पुलिस अवर निरीक्षक (दरोगा) के 1,799 पदों की भर्ती परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान कई जगह छात्रों और पुलिस के बीच तनातनी की स्थिति बनी।
गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च
छात्रों का जुलूस गांधी मैदान से शुरू हुआ, जिसे सुरक्षाबलों ने जेपी गोलंबर के पास रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का एक समूह मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगा, जबकि दूसरा समूह पटना जंक्शन पहुंचकर रेल पटरी पर बैठ गया और ट्रेनों की आवाजाही बाधित करने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने वाले कई अभ्यर्थियों को अलग-अलग जगहों से हिरासत में लिया गया।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- 70वीं बीपीएससी परीक्षा को रद्द किया जाए
- दरोगा भर्ती परीक्षा को रद्द कर निष्पक्ष जांच कराई जाए
- परीक्षाओं के लिए नियमित जॉब कैलेंडर जारी हो
- संविदा व्यवस्था से जुड़े 25 प्रतिशत वेटेज नियम को खत्म किया जाए
क्या हैं आरोप
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) ने मई 2026 में दरोगा भर्ती की मुख्य लिखित परीक्षा कराई थी, जिसमें लगभग 35,857 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार, 27 मई की परीक्षा के बाद कुछ केंद्रों पर कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं और सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र की एक कथित तस्वीर वायरल होने से सवाल उठे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई है।
प्रशासन का पक्ष
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ी और एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं की आवाजाही पर असर पड़ा। उनके मुताबिक, स्कूली बच्चे भी जाम में फंस गए।
गौरतलब है कि बिहार में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले भी कई बार छात्र आंदोलन हो चुके हैं। फिलहाल आयोगों की ओर से छात्रों की मांगों पर कोई नया आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।



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