नई दिल्ली | भीषण बाढ़ के बाद बिजली संकट से जूझ रहे पड़ोसी देश नेपाल की मदद के लिए भारत ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने सोमवार, 14 सितंबर को नेपाल विद्युत प्राधिकरण को कुल 654 मेगावाट तक बिजली निर्यात की मंजूरी देने की जानकारी दी। यह आपूर्ति रोजाना 18 घंटे के लिए 31 दिसंबर 2026 तक की जाएगी। रिपोर्टों के मुताबिक, यह व्यवस्था 13 सितंबर से प्रभावी मानी गई है।
किन लाइनों से जाएगी बिजली
- मुजफ्फरपुर-ढल्केबर 400 केवी लाइन: 600 मेगावाट तक
- टनकपुर-महेंद्रनगर 132 केवी लाइन: 54 मेगावाट तक
मंत्रालय का कहना है कि यह मंजूरी नेपाल की तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए दी गई है। जनवरी 2027 से कितनी बिजली भेजी जाएगी, इसकी समीक्षा दिसंबर में की जाएगी। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि इस कदम से कठिन दौर में नेपाल को राहत मिलेगी और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत होगा।
बाढ़ ने बिगाड़ा बिजली तंत्र
नेपाल में 26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर क्षेत्र में पहाड़ का हिस्सा ढहने के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और हजारों लोग लापता बताए गए। रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ से सात चालू जलविद्युत परियोजनाओं और पांच सौर संयंत्रों को नुकसान पहुंचा, जिससे लगभग 275 मेगावाट बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।
निर्यातक से आयातक बना नेपाल
नेपाल अपनी लगभग पूरी बिजली जरूरत पनबिजली से पूरी करता रहा है। हाल के वर्षों में बरसात के मौसम में वह अतिरिक्त बिजली भारत को बेचता भी रहा है। लेकिन इस आपदा के बाद हालात उलट गए हैं और उसे अपनी जरूरत के लिए भारत से बिजली खरीदनी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार ट्रांसमिशन लाइनों का नेटवर्क ऐसे संकट के समय दोनों देशों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। नेपाल में पुनर्निर्माण का काम लंबा चलने की संभावना है, ऐसे में आने वाले महीनों में भारत से बिजली आपूर्ति की भूमिका और अहम हो सकती है।



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