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सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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राम मंदिर दान गबन मामला: अयोध्या के वकीलों ने आरोपियों की पैरवी से किया इनकार

अयोध्या: राम मंदिर के दान में कथित गबन के मामले को लेकर सोमवार को तनाव और बढ़ गया, जब अयोध्या के वकीलों ने ऐलान किया कि वे इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे…

राम मंदिर दान गबन मामला: अयोध्या के वकीलों ने आरोपियों की पैरवी से किया इनकार
Tension around the alleged Ram Temple donation embezzlement case intensified on Monday after lawyers in Ayodhya announced that they would not represent the eight accused arrested in the matter.

अयोध्या: राम मंदिर के दान में कथित गबन के मामले को लेकर सोमवार को तनाव और बढ़ गया, जब अयोध्या के वकीलों ने ऐलान किया कि वे इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे।

यह फैसला फैजाबाद बार एसोसिएशन की एक बैठक में लिया गया, जहां सदस्यों ने कहा कि मंदिर के दान के कथित दुरुपयोग ने जनभावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। प्रस्ताव के अनुसार, बार से जुड़ा कोई भी वकील आरोपियों की ओर से अदालत में पेश नहीं होगा।

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई सदस्य आरोपियों की पैरवी करने का फैसला करता है, तो प्रति आरोपी ₹5 लाख का आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है। यह सख्त रुख अयोध्या में इस मुद्दे के भावनात्मक महत्व को दर्शाता है, जहां राम मंदिर धार्मिक आस्था और सार्वजनिक पहचान का केंद्र बना हुआ है।

मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दान और चढ़ावे के कथित गबन के सिलसिले में पुलिस ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। एक स्थानीय अदालत ने सभी आठों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, वहीं जांचकर्ता बैंक लेन-देन और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जारी रखे हुए हैं।

अब यह विवाद आपराधिक जांच से आगे बढ़कर एक बड़ी कानूनी बहस बन गया है। भारतीय कानून के तहत हर आरोपी को कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार है, और कई कानूनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या वकीलों द्वारा सामूहिक रूप से पैरवी से इनकार करना संवैधानिक और पेशेवर दायित्वों के अनुरूप है।

इस बीच, सीबीआई जांच की मांग भी तेज होती जा रही है। कई संगठनों ने यह पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच की मांग की है कि कहीं इन कथित अनियमितताओं में वित्तीय कुप्रबंधन का कोई बड़ा नेटवर्क तो शामिल नहीं है।

जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ रहा है, इस घोटाले ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है और धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन में जवाबदेही, पारदर्शिता और भरोसे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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