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सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
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जारी 53.3 करोड़ डॉलर की क़ानूनी लड़ाई में पेश बैंक दस्तावेज़ों का दावा—पैसे की हेराफेरी नहीं, रकम थिंक एंड लर्न में लौट आई

संकटग्रस्त एडटेक कंपनी बायजू से जुड़े 53.3 करोड़ डॉलर की आवाजाही को लेकर जारी क़ानूनी विवाद में अमेरिका और भारत में हुई नई अदालती फ़ाइलिंग ने नए सबूत पेश किए हैं। दस्तावेज़ों के अनुसार…

जारी 53.3 करोड़ डॉलर की क़ानूनी लड़ाई में पेश बैंक दस्तावेज़ों का दावा—पैसे की हेराफेरी नहीं, रकम थिंक एंड लर्न में लौट आई
Bank documents submitted in Ongoing $533 Million Legal battle claim no siphoning of money Money came back to Think and Learn

संकटग्रस्त एडटेक कंपनी बायजू से जुड़े 53.3 करोड़ डॉलर की आवाजाही को लेकर जारी क़ानूनी विवाद में अमेरिका और भारत में हुई नई अदालती फ़ाइलिंग ने नए सबूत पेश किए हैं।

अमेरिकी अदालतों और यहाँ तक कि भारत में एनसीएलटी अदालत में ऋणदाताओं द्वारा पेश किए गए दस्तावेज़ों के अनुसार, विवादित रकम में से लगभग 46 करोड़ डॉलर बायजू की मूल कंपनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड को वापस स्थानांतरित कर दिए गए। फ़ाइलिंग में आगे कहा गया है कि शेष धनराशि का इस्तेमाल कर देनदारियों, लेन-देन शुल्क और अन्य संबंधित खर्चों को पूरा करने में किया गया।

ये दस्तावेज़ इस मामले में संस्थापक का बचाव पक्ष हैं और अभी तक अदालतों द्वारा इनकी परख या स्वीकृति नहीं हुई है। विवाद में शामिल ऋणदाता इन दावों का विरोध जारी रखे हुए हैं, और किसी भी अदालत ने अभी इस पर अंतिम फ़ैसला नहीं दिया है कि विवादित धनराशि का दुरुपयोग हुआ था या लेन-देन क़ानूनी थे। अदालती दस्तावेज़ यह साफ़ कर देते हैं कि धन का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ, जैसा कि उन लोगों ने पेश किया है जिन्होंने ये आरोप लगाए थे।

यह क़ानूनी लड़ाई ऋणदाताओं के एक समूह के इन आरोपों पर केंद्रित है कि 1.2 अरब डॉलर के एक टर्म लोन से जुड़ी धनराशि का अनुचित तरीक़े से हस्तांतरण किया गया। रवींद्रन लगातार किसी भी गड़बड़ी से इनकार करते रहे हैं, और यह कहते आए हैं कि पैसा न तो छिपाया गया और न ही निजी लाभ के लिए इधर-उधर किया गया।

कार्यवाही के दौरान पहले एक अमेरिकी अदालत ने रवींद्रन के ख़िलाफ़ एकतरफ़ा फ़ैसला (डिफ़ॉल्ट जजमेंट) दिया था, यह पाते हुए कि वे दस्तावेज़ों को पेश करने समेत डिस्कवरी दायित्वों का पालन करने में विफल रहे। यह आदेश प्रक्रियात्मक प्रकृति का था और इसने 53.3 करोड़ डॉलर को लेकर ऋणदाताओं के आरोपों के गुण-दोष का निर्धारण नहीं किया। हर्जाने और अन्य मूल मुद्दों से जुड़े विषय अभी भी अदालत के समक्ष लंबित हैं।

यह विवाद बायजू की स्थिति में एक नाटकीय गिरावट के बीच सामने आया है। कभी लगभग 22 अरब डॉलर मूल्यांकित रही यह कंपनी दिवालिया कार्यवाही, बड़े पैमाने पर छँटनी और अपने कारोबारी परिचालन में भारी संकुचन का सामना कर चुकी है।

इस बीच, विवाद सुलझाने की दिशा में बातचीत जारी है। चर्चाओं में बायजू की सबसे मूल्यवान बची हुई संपत्तियों में से एक, आकाश एजुकेशनल सर्विसेज़ से जुड़े एक प्रस्तावित लेन-देन को शामिल किया गया है। किसी भी समझौते या पुनर्गठन योजना के लिए भारत, अमेरिका और सिंगापुर की अदालतों से मंज़ूरी की ज़रूरत होने की उम्मीद है।

ताज़ा फ़ाइलिंग विवादित लेन-देन का एक नया ब्यौरा देती हैं और इस आरोप को चुनौती देती हैं कि 53.3 करोड़ डॉलर छिपाए गए थे या उनका कोई हिसाब नहीं था। हालाँकि, क़ानूनी विवाद अनसुलझा बना हुआ है, और आपस में टकराते दावों का फ़ैसला अंततः सभी पक्षों द्वारा पेश सबूतों पर विचार करने के बाद अदालतें ही करेंगी।

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बिज़नेस डेस्क · संपादकीय डेस्क

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