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शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
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गांधारी रिव्यू राउंडअप: तापसी पन्नू के एक्शन अवतार की तारीफ, पर कहानी पर समीक्षक बंटे

नेटफ्लिक्स पर आई देवाशीष मखीजा की एक्शन थ्रिलर 'गांधारी' में तापसी पन्नू एक ऐसी मां बनी हैं जो अगवा बेटी की तलाश में है। उनकी शारीरिक मेहनत सराही गई, लेकिन कई समीक्षकों को पटकथा कमजोर लगी।

गांधारी रिव्यू राउंडअप: तापसी पन्नू के एक्शन अवतार की तारीफ, पर कहानी पर समीक्षक बंटे
नेटफ्लिक्स स्ट्रीमिंग की प्रतीकात्मक तस्वीर — फोटो: Ajay Suresh from New York, NY, USA / Wikimedia Commons (CC BY 2.0)

मुंबई | तापसी पन्नू की एक्शन थ्रिलर 'गांधारी' 3 सितंबर से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। 'भोंसले' और 'जोरम' जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले देवाशीष मखीजा ने इसका निर्देशन किया है, जबकि लेखन और निर्माण की जिम्मेदारी कनिका ढिल्लों ने संभाली है। फिल्म हिंदी के साथ तमिल, तेलुगु और अंग्रेजी में भी उपलब्ध है।

कहानी की झलक

तापसी ने बानी नाम की मां का किरदार निभाया है, जिसकी छोटी बेटी का अपहरण हो जाता है। एक हिंसक हमले में बानी की आंखों की रोशनी अस्थायी रूप से चली जाती है, लेकिन वह अपनी बाकी इंद्रियों के सहारे अपहरणकर्ताओं तक पहुंचने की कोशिश करती है। यह तलाश उसे जॉयपुरा नाम के एक काल्पनिक कस्बे तक ले जाती है, जहां बाल तस्करी, बहुरूपियों की दुनिया और पुरानी लोककथाएं आपस में गुंथी हुई हैं। इशवाक सिंह और स्वस्तिका मुखर्जी भी अहम भूमिकाओं में हैं।

समीक्षकों ने क्या कहा

  • ओपन मैगजीन में कावेरी बामजई ने तापसी के प्रदर्शन को बेहद सराहा। उनके मुताबिक अभिनेत्री ने एक्शन और स्टंट दृश्यों में जबरदस्त शारीरिक मेहनत दिखाई है और मखीजा ने कहानी में समाज की उदासीनता से लेकर हाशिये के समुदायों के प्रति पूर्वाग्रह तक 'अंधेपन' की कई परतें पिरोई हैं।
  • द फेडरल में पौलोमी दास की समीक्षा काफी आलोचनात्मक रही। उन्होंने लिखा कि फिल्म दृश्य भाषा के बजाय संवादों से बात समझाने पर निर्भर है, शीर्षक के प्रतीकात्मक अर्थ को गहराई से नहीं टटोलती और लगातार एक ही तीव्रता पर चलती है।
  • रिव्यू एग्रीगेटर रॉटन टोमैटोज़ पर दर्ज 13 समीक्षाओं में से केवल 23 प्रतिशत सकारात्मक रहीं।

कुछ अन्य समीक्षाओं में भी कहा गया कि फिल्म का मूल विचार मजबूत है, लेकिन वह उसे एक असरदार फिल्म में नहीं बदल पाती और थ्रिलर के तौर पर तनाव बनाए रखने में चूक जाती है।

कुल मिलाकर

समीक्षकों की राय में 'गांधारी' तापसी पन्नू की प्रतिबद्धता और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण भूमिका के लिए देखी जा सकती है। एक दृष्टिहीन हो चुकी मां का बदला और संघर्ष कागज पर दमदार विचार है। लेकिन ज्यादातर आलोचकों को लगा कि भारी-भरकम ड्रामा, एक के बाद एक त्रासदियों का ढेर और बिखरा हुआ कथानक फिल्म के असर को कम कर देते हैं।

एक्शन थ्रिलर पसंद करने वाले और तापसी के प्रशंसक इसे एक बार आजमा सकते हैं, पर कसी हुई सस्पेंस कहानी की उम्मीद रखने वाले दर्शकों को निराशा हो सकती है।

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मूवी रिव्यू डेस्क · संपादकीय डेस्क

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