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गुरुवार, 17 सितंबर 2026
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घमासान रिव्यू राउंडअप: डकैत बने अरशद वारसी के अभिनय की तारीफ, तिग्मांशु धूलिया की कहानी पर बंटी राय

ZEE5 पर रिलीज तिग्मांशु धूलिया की क्राइम ड्रामा 'घमासान' में अरशद वारसी और प्रतीक गांधी की टक्कर है। समीक्षकों ने दोनों के अभिनय को सराहा, लेकिन पटकथा को जाना-पहचाना बताया।

घमासान रिव्यू राउंडअप: डकैत बने अरशद वारसी के अभिनय की तारीफ, तिग्मांशु धूलिया की कहानी पर बंटी राय
चंबल के बीहड़ों का एक दृश्य (प्रतीकात्मक फोटो) — फोटो: Biswarup Ganguly / Wikimedia Commons (CC BY 3.0)

मुंबई | 'पान सिंह तोमर' और 'साहेब बीवी और गैंगस्टर' जैसी फिल्मों के निर्देशक तिग्मांशु धूलिया की नई फिल्म 'घमासान' 11 सितंबर से ZEE5 पर स्ट्रीम हो रही है। बुंदेलखंड के बीहड़ों की पृष्ठभूमि में बनी यह क्राइम ड्रामा एक खूंखार डकैत और उसे पकड़ने निकले पुलिस अधिकारी के बीच चूहे-बिल्ली के खेल की कहानी है।

कहानी और किरदार

फिल्म में अरशद वारसी 'महाराज' नाम के ताकतवर डकैत की भूमिका में हैं, जबकि प्रतीक गांधी आईपीएस अधिकारी आदित्य सिंह बने हैं, जिसे इलाके में महाराज का आतंक खत्म करने की जिम्मेदारी मिलती है। स्थानीय सत्ता, राजनीति और कानून के बीच फंसी इस लड़ाई में इशिता दत्ता भी नजर आती हैं। बॉलीवुड हंगामा के अनुसार कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित है।

समीक्षकों ने क्या कहा

  • बॉलीवुड हंगामा ने फिल्म को 5 में से 3 स्टार दिए। समीक्षा में अरशद वारसी के अभिनय को उनके करियर के बेहतरीन प्रदर्शनों में गिना गया और बिना गानों व रोमांस के सीधी कहानी कहने के धूलिया के अंदाज की सराहना हुई। हालांकि दूसरे हिस्से में रफ्तार धीमी पड़ने, आदिवासी बच्चों वाले ट्रैक के अधूरे रहने और संपादन को और कसा जा सकने की बात कही गई।
  • कोईमोई ने 5 में से 2 स्टार देते हुए लिखा कि दोनों मुख्य कलाकारों की मेहनत के बावजूद कमजोर पटकथा फिल्म को ऊपर नहीं उठा पाती। दूसरे हिस्से को अपराध फिल्मों के घिसे-पिटे फॉर्मूलों से भरा बताया गया और प्रतीक गांधी के संयमित अभिनय की तारीफ की गई।
  • द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया में राहुल देसाई ने इसे एक व्यावहारिक और धूल-मिट्टी से सनी कॉप-डकैत ड्रामा बताया और इसे धूलिया की फॉर्म में वापसी माना, हालांकि तेज रफ्तार के कारण भावनात्मक ठहराव की कमी की ओर भी इशारा किया।
  • WION ने फिल्म को दमदार लेकिन जानी-पहचानी क्राइम ड्रामा करार दिया।

कुल मिलाकर

समीक्षकों की राय में 'घमासान' का सबसे मजबूत पक्ष अरशद वारसी का बदला हुआ रूप है। कॉमेडी भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले अरशद यहां एक डरावने खलनायक के रूप में असर छोड़ते हैं, जबकि प्रतीक गांधी बिना किसी हीरोगिरी के एक ईमानदार अफसर को विश्वसनीय बनाते हैं। दूसरी ओर, कहानी में बड़े मोड़ों की कमी, खिंचा हुआ पीछा और अधपके राजनीतिक विचार इसे धूलिया की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों की कतार में खड़ा नहीं होने देते।

बीहड़ों की पृष्ठभूमि वाली देसी क्राइम ड्रामा पसंद करने वाले और दोनों कलाकारों के प्रशंसकों के लिए यह एक बार देखी जा सकने वाली फिल्म मानी जा रही है।

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मूवी रिव्यू डेस्क · संपादकीय डेस्क

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