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गुरुवार, 17 सितंबर 2026
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समझिए: भारत-मर्कोसुर व्यापार समझौते के विस्तार की बातचीत क्या है और इससे क्या बदलेगा

भारत और दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मर्कोसुर ने 14 सितंबर को तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार पर बातचीत शुरू करने की घोषणा की। जानिए इसका महत्व।

समझिए: भारत-मर्कोसुर व्यापार समझौते के विस्तार की बातचीत क्या है और इससे क्या बदलेगा
मर्कोसुर का ध्वज (प्रतीकात्मक तस्वीर) — फोटो: Moacir Ximenes / Wikimedia Commons (Public domain)

नई दिल्ली | भारत ने दक्षिण अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाने की दिशा में एक नया कदम उठाया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने 14 सितंबर 2026 को भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते (पीटीए) के विस्तार के लिए वार्ता शुरू करने की घोषणा की। उरुग्वे इस समय मर्कोसुर की अस्थायी अध्यक्षता संभाल रहा है।

मर्कोसुर क्या है?

मर्कोसुर दक्षिण अमेरिकी देशों का एक व्यापारिक समूह है। इसमें अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे, उरुग्वे और बोलीविया शामिल हैं। यह समूह अपने सदस्यों के बीच व्यापार आसान बनाने और बाहरी देशों के साथ मिलकर समझौते करने का काम करता है।

मौजूदा समझौता कितना बड़ा है?

भारत और मर्कोसुर के बीच पीटीए 2004 में हस्ताक्षरित हुआ था और जून 2009 से लागू है। लेकिन इसका दायरा सीमित है। इसमें भारत की करीब 450 और मर्कोसुर की 452 टैरिफ लाइनें यानी उत्पाद श्रेणियां ही शामिल हैं। इन पर शुल्क में 10 से 100 प्रतिशत तक की रियायत मिलती है। तरजीही समझौते में सभी वस्तुओं पर नहीं, बल्कि चुनिंदा उत्पादों पर ही छूट दी जाती है।

अब क्या होगा?

  • पीआईबी के अनुसार दोनों पक्ष मौजूदा समझौते को आपसी हित के और क्षेत्रों तक फैलाने पर सहमत हुए हैं।
  • फिलहाल 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' तय किए जा रहे हैं, जो भविष्य के विस्तारित समझौते का दायरा और ढांचा निर्धारित करेंगे।
  • मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इसी दिन इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन को मान्यता देने वाले प्रोटोकॉल पर भी हस्ताक्षर हुए, जिससे कागजी कार्रवाई कम होने की उम्मीद है।

भारत के लिए क्यों अहम?

रिपोर्टों के अनुसार 2025 में भारत और मर्कोसुर के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 21 अरब डॉलर रहा। दवाएं, मशीनरी, रसायन और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्र इस व्यापार में अहम हैं। समझौते का दायरा बढ़ने से भारतीय निर्यातकों को नए बाजार मिल सकते हैं, वहीं भारत के लिए कृषि उत्पादों और खनिजों जैसे कच्चे माल के स्रोतों में विविधता आ सकती है।

ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार में टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, भारत अलग-अलग क्षेत्रों के साथ व्यापार संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि व्यापार वार्ताएं आमतौर पर लंबी चलती हैं और अंतिम समझौते का स्वरूप टर्म्स ऑफ रेफरेंस तय होने के बाद ही साफ होगा।

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एक्सप्लेनर डेस्क · संपादकीय डेस्क

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