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शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
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UPI पर नया नियम: 2,000 रुपये से ज़्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR, 15 अक्टूबर से लागू

रिपोर्टों के अनुसार यह शुल्क दुकानदारों और कारोबारियों को चुकाना होगा, अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच UPI ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

UPI पर नया नियम: 2,000 रुपये से ज़्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR, 15 अक्टूबर से लागू
हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में एक जनरल स्टोर, प्रतीकात्मक तस्वीर (फाइल फोटो) — फोटो: Gerd Eichmann / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

नई दिल्ली | डिजिटल भुगतान की दुनिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार 15 सितंबर को UPI के लिए नई शुल्क व्यवस्था की घोषणा की गई, जिसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यानी दुकानदारों और कारोबारियों को किए जाने वाले भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगेगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी।

आम ग्राहकों पर असर नहीं

MDR वह शुल्क है जो भुगतान प्रक्रिया के बदले व्यापारी बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडरों को देते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक आम उपभोक्ताओं से इस पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। बताया गया है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि व्यापारी यह लागत ग्राहकों पर न डालें, और UPI ऐप्स को भी अलग से प्लेटफॉर्म फीस या छिपे शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

नई व्यवस्था की मुख्य बातें

  • 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR, प्रति लेनदेन अधिकतम 300 रुपये।
  • 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर कोई शुल्क नहीं। रिपोर्टों के अनुसार ऐसे छोटे भुगतान कुल P2M लेनदेन की संख्या का 95 प्रतिशत से ज़्यादा हैं।
  • व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।
  • रेलवे, ईंधन, बीमा, टेलीकॉम जैसी ज़रूरी सेवाओं और सरकारी बिल भुगतान में 2,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर 5 रुपये का तय शुल्क।
  • म्यूचुअल फंड और प्रतिभूति बाज़ार से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत MDR, अधिकतम 300 रुपये।

क्यों लाया गया शुल्क

रिपोर्टों के मुताबिक नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) का कहना है कि इस शुल्क से होने वाली आय का इस्तेमाल भुगतान ढांचे, साइबर सुरक्षा, नवाचार और ग्राहक सेवा में निवेश के लिए किया जाएगा। लंबे समय से बैंक और फिनटेक कंपनियां यह कहती रही हैं कि शून्य MDR व्यवस्था में UPI नेटवर्क को चलाने और बढ़ाने की लागत निकालना मुश्किल है।

कारोबार और बाज़ार पर असर

बड़े भुगतान लेने वाले व्यापारियों, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी और ऑटो डीलरों की लागत पर इसका असर पड़ सकता है। वहीं बैंकिंग और पेमेंट कंपनियों के लिए इसे कमाई के नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है। कुछ बाज़ार रिपोर्टों में 16 सितंबर को वित्तीय शेयरों की मज़बूती को भी इस फैसले से जोड़ा गया। आने वाले दिनों में लागू होने से जुड़े विस्तृत दिशानिर्देशों पर कारोबारियों की नज़र रहेगी।

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बिज़नेस डेस्क · संपादकीय डेस्क

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