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गुरुवार, 17 सितंबर 2026
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शेयर बाज़ार में लौटी रौनक: सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,200 के पार; बैंक और FMCG शेयरों ने संभाला

दो दिन की गिरावट के बाद बुधवार को घरेलू बाज़ार हरे निशान में बंद हुए। आईटी और फार्मा शेयरों पर दबाव रहा, जबकि निवेशकों की नज़र अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के फैसले पर टिकी रही।

शेयर बाज़ार में लौटी रौनक: सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,200 के पार; बैंक और FMCG शेयरों ने संभाला
मुंबई के दलाल स्ट्रीट स्थित बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत (फाइल फोटो) — फोटो: BSEINDIA / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

मुंबई | भारतीय शेयर बाज़ार ने बुधवार, 16 सितंबर को दो सत्रों से जारी गिरावट पर ब्रेक लगाया। बैंकिंग, वित्तीय और FMCG शेयरों में खरीदारी के दम पर बीएसई सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,336.45 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 99 अंक या 0.43 प्रतिशत चढ़कर 23,217.60 पर पहुंच गया और 23,200 का स्तर फिर हासिल कर लिया।

एक दिन पहले आई थी तेज़ गिरावट

इससे पहले मंगलवार, 15 सितंबर को बाज़ार में भारी बिकवाली देखी गई थी। उस दिन सेंसेक्स 777.94 अंक टूटकर 74,003.82 पर और निफ्टी 279.50 अंक गिरकर 23,118.60 पर बंद हुआ था। बाज़ार रिपोर्टों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और फेड के फैसले से पहले की सतर्कता ने तब बाज़ार पर दबाव बनाया था।

किन शेयरों में रही हलचल

बुधवार को FMCG और सरकारी बैंकों के सूचकांक एक-एक प्रतिशत से ज़्यादा चढ़े। प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में ये रहे:

  • एचडीएफसी लाइफ: करीब 2.73 प्रतिशत
  • एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस: करीब 2.65 प्रतिशत
  • आईटीसी: करीब 2.38 प्रतिशत
  • एक्सिस बैंक: करीब 1.48 प्रतिशत

दूसरी ओर आईटी और फार्मा ही ऐसे सेक्टर रहे जो लाल निशान में बंद हुए। टीसीएस में लगभग 2.76 प्रतिशत, विप्रो में 1.83 प्रतिशत, इंफोसिस में 1.58 प्रतिशत और टेक महिंद्रा में 1.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका से टेक निर्यातक कंपनियों पर दबाव रहा।

बढ़त चुनिंदा शेयरों तक सीमित

सूचकांकों में तेज़ी के बावजूद बाज़ार की चौड़ाई कमज़ोर रही। एनएसई पर 1,913 शेयर बढ़त में रहे, जबकि 2,241 शेयरों में गिरावट आई। इससे संकेत मिलता है कि सुधार मुख्य रूप से कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी से आया। कुछ बाज़ार रिपोर्टों में वित्तीय शेयरों की मज़बूती को UPI पर मर्चेंट शुल्क से जुड़ी नई व्यवस्था से भी जोड़ा गया।

आगे क्या

बाज़ार रिपोर्टों के अनुसार ब्रेंट क्रूड करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ऊंचे स्तर पर बना रहा, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। विदेशी निवेशकों की निकासी की आशंका और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत घोषणा आने वाले सत्रों में बाज़ार की दिशा तय करने वाले अहम कारक माने जा रहे हैं।

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बिज़नेस डेस्क · संपादकीय डेस्क

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