नई दिल्ली | निर्यात में मज़बूत बढ़ोतरी के चलते अगस्त 2026 में भारत का कुल व्यापार घाटा कम हुआ है। 15 सितंबर को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर देश का व्यापार घाटा अगस्त में 9.41 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 11.62 अरब डॉलर था। निर्यात की रफ्तार आयात के मुकाबले तेज़ रहने से यह सुधार देखने को मिला।
कुल निर्यात और आयात
अगस्त में वस्तुओं और सेवाओं का कुल अनुमानित निर्यात सालाना आधार पर 25.41 प्रतिशत बढ़कर 82.68 अरब डॉलर पहुंच गया। अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 65.93 अरब डॉलर था। इसी दौरान कुल आयात 77.55 अरब डॉलर से बढ़कर 92.09 अरब डॉलर हो गया।
वस्तु व्यापार की स्थिति
- वस्तु निर्यात 26.12 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल अगस्त में 34.74 अरब डॉलर था।
- वस्तु आयात 61.96 अरब डॉलर से बढ़कर 70.67 अरब डॉलर हो गया।
- इस तरह केवल वस्तुओं का व्यापार घाटा करीब 26.86 अरब डॉलर रहा।
सेवा क्षेत्र का सहारा
सेवा क्षेत्र एक बार फिर भारत के बाहरी खाते के लिए बड़ा सहारा बना। अगस्त में सेवाओं का निर्यात अनुमानित 38.87 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के 31.19 अरब डॉलर के मुकाबले 24.61 प्रतिशत अधिक है। सेवाओं का आयात 15.59 अरब डॉलर से बढ़कर 21.42 अरब डॉलर हो गया। सेवा व्यापार में बड़े अधिशेष ने वस्तु व्यापार के घाटे की काफी हद तक भरपाई की।
क्यों अहम हैं ये आंकड़े
व्यापार घाटे में कमी चालू खाते और रुपये के लिहाज़ से राहत भरी मानी जाती है। ऐसे समय में जब कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने हुए हैं और थोक स्तर पर ईंधन महंगाई 20 प्रतिशत से ऊपर है, निर्यात में तेज़ बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि आयात में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसमें ऊर्जा की ऊंची कीमतों की भूमिका अहम है।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक मांग, पश्चिम एशिया के हालात और तेल की कीमतें भारत के व्यापार संतुलन की दिशा तय करेंगे। त्योहारी सीज़न से पहले सोने और उपभोक्ता वस्तुओं के आयात पर भी नज़र रखी जाएगी।


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