आगरा | शादी के लिए जीवनसाथी तलाश रहे लोगों को ऑनलाइन ठगने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसका कॉल सेंटर आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में चल रहा था। दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर थाने की टीम ने 4 सितंबर को सिकंदरा स्थित एक अपार्टमेंट में छापा मारा और बाद में 8 सितंबर को गिरोह के कथित सरगना को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक पकड़ा गया 29 वर्षीय आरोपी पेशे से वकील है।
ऐसे चलता था ठगी का खेल
पुलिस जांच के अनुसार गिरोह 'मैचमेकिंग सेवा' के नाम पर काम कर रहा था। इंटरनेट से ली गई तस्वीरों के सहारे फर्जी प्रोफाइल बनाए जाते थे। शादी के इच्छुक लोगों को इन प्रोफाइल के जरिए बातचीत में उलझाया जाता और फिर अलग-अलग बहानों से भुगतान करवाया जाता था।
- रजिस्ट्रेशन शुल्क
- प्रोफाइल देखने की फीस
- अकाउंट एक्टिवेशन चार्ज
- कॉन्टैक्ट नंबर अनलॉक करने का शुल्क
पुलिस का कहना है कि गिरोह ने एक व्यक्ति से अधिकतम करीब 15 हजार रुपये तक ही वसूलने की रणनीति बना रखी थी, ताकि रकम छोटी होने के कारण पीड़ित शिकायत करने से कतराएं।
एक शिकायत से खुली परतें
मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित ने करीब 15 हजार रुपये की ठगी की शिकायत की। जांच में पता चला कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आई छह शिकायतें एक ही बैंक खाते से जुड़ी थीं। इसी सुराग के आधार पर पुलिस आगरा के कॉल सेंटर तक पहुंची।
टेलीकॉलर्स को मिलता था इंसेंटिव
पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर एक फर्म के नाम से चलाया जा रहा था, जिसकी संचालक के रूप में 44 वर्षीय एक महिला सामने थी। वहां काम करने वाली आठ महिला टेलीकॉलर्स को हर महीने करीब छह-सात हजार रुपये वेतन के साथ वसूली पर 10 प्रतिशत इंसेंटिव दिया जाता था। आरोप है कि वकील आरोपी ही इस पूरे काम में पैसा लगाता और संचालन की रूपरेखा तय करता था।
साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर भुगतान से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें और अनजान नंबरों पर पैसे न भेजें। ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।


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