नई दिल्ली | राजधानी के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सदस्य देशों के साझा घोषणापत्र के साथ संपन्न हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में 12 सितंबर को ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से 'न्यू दिल्ली घोषणापत्र' को स्वीकार किया। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन की थीम 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' रखी गई थी।
घोषणापत्र के प्रमुख बिंदु
रिपोर्टों के अनुसार, यह घोषणापत्र करीब 140 अनुच्छेदों का विस्तृत दस्तावेज है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक से जुड़े कई विषय शामिल हैं। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार बताए गए हैं:
- संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर
- बहुपक्षवाद को मजबूत करने और विकासशील देशों की आवाज बढ़ाने की प्रतिबद्धता
- आतंकवाद की निंदा
- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता और सभी पक्षों से अधिकतम संयम की अपील, हालांकि किसी देश का नाम नहीं लिया गया
- व्यापार, ऊर्जा, जलवायु, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संचालन, स्वास्थ्य और कृषि में सहयोग
प्रधानमंत्री का संदेश
सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने समावेशी वैश्विक विकास की बात की। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों को हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ आगाह किया और कहा कि ग्लोबल साउथ को नियम मानने वाले से आगे बढ़कर नियम तय करने की भूमिका में आना चाहिए।
सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा समेत सदस्य देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। साझेदार देशों के साथ आउटरीच सत्र भी आयोजित किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सम्मेलन के सफल आयोजन पर भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
अगला मेजबान चीन
बताया गया है कि अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने देश के 30 शहरों में ब्रिक्स से जुड़ी 400 से अधिक बैठकें आयोजित कीं। अगले वर्ष 2027 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी चीन करेगा। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि सर्वसम्मति से घोषणापत्र का पारित होना मौजूदा वैश्विक तनाव के माहौल में मेजबान भारत के लिए अहम उपलब्धि है।



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